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current 26 july


  • नीलगिरी  माउंटेन रेल्वे को यूनेस्को की विश्व धरोगर सूची में शामिल किया गया है। यह भारत के 5 पहाड़ी रेल्वे  में से एक है। 
  • हाल ही में ख़ादी एंव ग्राम उद्योग आयोग ने खादी को बोर्ड मार्क और खादी इंडिया को ट्रेड मार्क के रूप में पंजीकृत करने के लिए आवेदन किया गया है। 
  • हाल ही में चीनी उपविदेश मंत्री की दो दिवसीय भूटान यात्रा में चीन और भूटान ने अपने सीमा विवादों पर चर्चा की। 
  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायलय में कहा है। कि बलात्कार पीड़ित के लिए संचालित सरकारी योजनाओं में योन उत्पीड़न हुए बच्चो को भी शामिल किया जाना चाहिए। 
  • न्यायमूर्ति मदन बी लोपुर तथा दीपक गुप्ता की एक खंडपीठ ने  सुझाव दिया कि राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित मुहावजे में बाल पीड़ित को शामिल किया गया। 
  • कार्बन करो को कम करने के लिए नीति आयोग ने कोलये के उपयोग को कम करने तथा सौर एंव पवन ऊर्जा को बढ़ाने के लिए सभी उद्योगों को अवगत किया। 

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NON-CHORDATA

जन्तु जगत ---  जंतुजगत के अंतर्गत बहुकोशिकीय, यूकेरियोटिक  कोशिका वाले जीव आते है।  इनमे क्लोरोफिल नहीं पाया जाता है यह विषमपोषी होते है।  इनमें  कोशिका भित्ति का अभाव होता है यह भोजन को निगल कर खाते हैइनमे भोजन ग्लाइकोजन के रूप में संचित रहता है।  जंतु  जल , थल , वायु तीनो जगह पाए जाते है।  जन्तुओ को कशेरुक दंड की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के आधार पर दो उपजागतो में बांटा गया है।  (1) कशेरुकी (कोर्डेटा )  (2) अकशेरुकी ( नॉन - कोर्डेटा ) अकशेरुकी ( नॉन - कोर्डेटा ) --- इस संघ में ऐसे जन्तुओ को रखा गया है जिनके जीवन काल में कशेरुक दंड नहीं पाया जाता है इसके अंतर्गत आने वाले जीवो को 10 संघो में बांटा गया है। (1)  पोरीफेरा -- इस संघ के अंतर्गत असंख्य छिद्र वाले जंतु आते है।  जिन्हे स्पंज कहते है।  यह जल में पाए जाते है। उदा. -- स्पोंजिला , साइकेन , युस्पंजिला  , युलेक्टेला , ओस्केरेला  आदि। (2)  प्रोटोजोआ --  इसका हम प्रॉटिस्टा जगत में अध्ययन कर चुके है।  उदा. -- अमीबा , युग्लीना  ...

PADAP JAGAT NOTES BY SHAILENDRA SIR

पादप जगत --- पादप जगत के अंर्तगत स्वंयपोषी जीव आते है।  ये भूमि एवं जल में पाए जाते है।  यह मुख्यतः 5 प्रकार के होते है- (1.) ब्रायोफाइटा   (2.) टेरीडोफाइट  (3.) शैवाल  (4.) आवृतबीजी पौधे   (5.) अनावृतबीजी पौधे ब्रायोफाइटा --- यह नम एवं छायादार स्थानों पर उगते है यह चट्टानों , दीवारों आदि स्थानों पर पाए जाते है। इन्हे  पादप जगत का उभयचर कहा जाता है इनमे संवहनीय ऊतक नहीं पाए जाते है। उदाहरण - रिक्सिया , मारकेंसिया , एंथोसेरोस , स्फेगनम टेरीडोफाइट -- यह भी नम एवं छायादार भूमि पर उगते है इनमे संवहनीय ऊतक पाए जाते है। उदहारण - मार्शिलिया , लाइकोपोडियम , रायनिया , सिलेजिनेला शैवाल ---  ;शैवालों के अध्ययन को फाइकोलॉजी कहा जाता है।  शैवाल विज्ञानं के पिता F. E. फ्रिश्च को कहा जाता है आधुनिक फाइकोलॉजी के पिता M.D.P. अायंगर को कहा जाता है।  शैवाल जलीय पादप है।  यह स्वस्छ एवं समुंद्री दोनों प्रकार के जल में  पाए जाते है।  यह सुकायत (थेलेकोईड ) होते है।  इनमे भोजन स्टार्च के रूप में एकत्रित रहता है।  शैवालों की...

BIOLOGY NOTES BY SHAILENDRA SIR..