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current 30 july


  • हाल ही के   अध्ययन में  पाया गया कि पश्चिम बंगाल के भूमिगत जल में आर्सेनिक प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।  इसकी अधिकता से ब्लू बेबी सिंड्रोम रोग होता है। 
  • भारत में थरमल (शक्ति ) सम्पत्तियाँ देश के लिए एक चिंता का विषय रही है।  इन परियोजनाओं को सुधारने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया।  इसकी अध्यक्षता कैविनेट सचिव करेंगे। 
  • हाल ही में सरकार ने टोलप्लाजा पर नगद भुगतान करने के लिए पास्टैग तकनीक का विकाश किया है।  इसके अंतर्गत टोलटैक्स पर बाहनो के बिना रुके जमा करने की सुविधा प्रदान करता है।  इसके अंतर्गत बाहनो पर टैग विंडस्क्रीन पर निर्धारित रहना है।  जिसके द्वारा टोल के गेट पर लगा हुआ रेडिओ फ्रीक्वेंसी पहचान एंटीना टैग की पहचान को स्केन करता है। 
  • हाल ही में केंद्र सरकार ने आभूषणों के निर्यात में सहायता के लिए  Domestic council for gold का गठन करने का निर्णय लिया। 
  • भारत के वाघो के अधिवासों के गंभीर खतरे के संबंध में 23 july को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि 399 सड़क परियोजना , रेल्वे  परियोजनाए 8 राज्यों में वाघो के आवासों को बाधित कर सकती है। 
  • हाल ही में कानून मंत्रालय ने कहा है कि बच्चो और महिलाओ के बलात्कार से संबधित मुकदमा के  लिए 1000 से अधिक फास्ट्रैक अदालतों की स्थापना की आवश्यकता है। 
  • हाल ही में केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा डीप ओसियन मिशन की रूप रेखा प्रस्तुत की। 
  • हाल ही में डिजी यात्रा परियोजना पर एक वर्ष से अधिक काम करने के बाद नागरिक रडडयन मंत्रालय ने हवाई अड्डों पर इस सेवा की शुरुआत की।  डिजी यात्रा  एक योजना है।  जिसका रद्देश्य हवाई अड्डों पर कतारों को कम करना है।   

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NON-CHORDATA

जन्तु जगत ---  जंतुजगत के अंतर्गत बहुकोशिकीय, यूकेरियोटिक  कोशिका वाले जीव आते है।  इनमे क्लोरोफिल नहीं पाया जाता है यह विषमपोषी होते है।  इनमें  कोशिका भित्ति का अभाव होता है यह भोजन को निगल कर खाते हैइनमे भोजन ग्लाइकोजन के रूप में संचित रहता है।  जंतु  जल , थल , वायु तीनो जगह पाए जाते है।  जन्तुओ को कशेरुक दंड की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के आधार पर दो उपजागतो में बांटा गया है।  (1) कशेरुकी (कोर्डेटा )  (2) अकशेरुकी ( नॉन - कोर्डेटा ) अकशेरुकी ( नॉन - कोर्डेटा ) --- इस संघ में ऐसे जन्तुओ को रखा गया है जिनके जीवन काल में कशेरुक दंड नहीं पाया जाता है इसके अंतर्गत आने वाले जीवो को 10 संघो में बांटा गया है। (1)  पोरीफेरा -- इस संघ के अंतर्गत असंख्य छिद्र वाले जंतु आते है।  जिन्हे स्पंज कहते है।  यह जल में पाए जाते है। उदा. -- स्पोंजिला , साइकेन , युस्पंजिला  , युलेक्टेला , ओस्केरेला  आदि। (2)  प्रोटोजोआ --  इसका हम प्रॉटिस्टा जगत में अध्ययन कर चुके है।  उदा. -- अमीबा , युग्लीना  ...

PADAP JAGAT NOTES BY SHAILENDRA SIR

पादप जगत --- पादप जगत के अंर्तगत स्वंयपोषी जीव आते है।  ये भूमि एवं जल में पाए जाते है।  यह मुख्यतः 5 प्रकार के होते है- (1.) ब्रायोफाइटा   (2.) टेरीडोफाइट  (3.) शैवाल  (4.) आवृतबीजी पौधे   (5.) अनावृतबीजी पौधे ब्रायोफाइटा --- यह नम एवं छायादार स्थानों पर उगते है यह चट्टानों , दीवारों आदि स्थानों पर पाए जाते है। इन्हे  पादप जगत का उभयचर कहा जाता है इनमे संवहनीय ऊतक नहीं पाए जाते है। उदाहरण - रिक्सिया , मारकेंसिया , एंथोसेरोस , स्फेगनम टेरीडोफाइट -- यह भी नम एवं छायादार भूमि पर उगते है इनमे संवहनीय ऊतक पाए जाते है। उदहारण - मार्शिलिया , लाइकोपोडियम , रायनिया , सिलेजिनेला शैवाल ---  ;शैवालों के अध्ययन को फाइकोलॉजी कहा जाता है।  शैवाल विज्ञानं के पिता F. E. फ्रिश्च को कहा जाता है आधुनिक फाइकोलॉजी के पिता M.D.P. अायंगर को कहा जाता है।  शैवाल जलीय पादप है।  यह स्वस्छ एवं समुंद्री दोनों प्रकार के जल में  पाए जाते है।  यह सुकायत (थेलेकोईड ) होते है।  इनमे भोजन स्टार्च के रूप में एकत्रित रहता है।  शैवालों की...

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